झाँसी। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरा झांसी के दीनदयाल सभागार में विगत दिवस बेसिक शिक्षा विभाग के तत्वावधान में एक अभूतपूर्व एवं गरिमामयी सारस्वत समारोह का आयोजन संपन्न हुआ। यह अनुष्ठान शिक्षा जगत में एक नव-युग के सूत्रपात का साक्षी बना, जहाँ वाराणसी की पावन धरा से प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री के ओजस्वी एवं प्रेरणादायी सजीव (लाइव) संबोधन का सीधा प्रसारण किया गया। इस मांगलिक अवसर पर राष्ट्र के शिल्पकार—शिक्षकों के कल्याणार्थ ‘कैशलेस हेल्थ कार्ड’ एवं ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का शंखनाद किया गया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ अनुष्ठान का शुभारंभ कार्यक्रम का शुभारंभ सनातन परंपरा के अनुरूप मुख्य अतिथि, उत्तर प्रदेश महिला कल्याण निगम की अध्यक्ष व राज्य मंत्री कमलावती सिंह एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। सभागार में उपस्थित संपूर्ण जनमानस मंत्रमुग्ध होकर इस पुनीत वेला का साक्षी बना।

विशिष्ट विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति इस वैचारिक महाकुंभ में क्षेत्र के मूर्धन्य जनप्रतिनिधियों एवं कर्मठ प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सांसद अनुराग शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पवन गौतम, एमएलसी रमा निरंजन, मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे, जिलाधिकारी गौरांग राठी सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी एवं भारी संख्या में प्रबुद्ध शिक्षक व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री का उद्बोधन: लोक-कल्याण का संकल्प वाराणसी से प्रसारित अपने सजीव संदेश में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के त्याग और राष्ट्र-निर्माण में उनके अप्रतिम योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने डिजिटल क्रांति के इस युग में शिक्षकों के सामाजिक और आर्थिक सुदृढ़ीकरण हेतु कैशलेस हेल्थ कार्ड और डीबीटी योजना का विधिवत शुभारंभ किया।

सभागार में उपस्थित वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा “शिक्षक केवल अक्षरों का ज्ञान देने वाले मार्गदर्शक नहीं हैं, अपितु वे शासन की लोक-कल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचाने वाले सबसे सशक्त संवाहक भी हैं।”

नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आह्वान समारोह के उत्तरार्ध में उपस्थित अतिथियों ने शिक्षकों से पूर्ण निष्ठा, उत्तरदायित्व और आधुनिक नवाचारों को आत्मसात करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को एक नवीन सोपान पर ले जाने का आह्वान किया। इस संपूर्ण गरिमामयी सत्र का अत्यंत कुशल, सुगठित और सुरुचिपूर्ण संचालन नवीन दुबे एवं डॉ. अनिरुद्ध रावत द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम के समापन पर राष्ट्र-निर्माण के इस महायज्ञ में सम्मिलित सभी जनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।











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