झाँसी। महानगर के एक मुख्य रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्र में इन दिनों नियमों को दरकिनार कर की जा रही गहरी खुदाई चर्चा और भय का विषय बनी हुई है। चार सितारा होटल, पेट्रोल पंप और बहुमंजिला कमर्शियल बिल्डिंगों से घिरे इस संवेदनशील इलाके में लगभग 45 से 50 फीट तक खुदाई की जा चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन के उजाले में तो काम चलता ही है, लेकिन रात के अंधेरे में बड़ी-बड़ी मशीनें और दर्जनों डम्फर मिट्टी व पत्थर ढोने में लग जाते हैं, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका प्रबल हो गई है।

नियमों की अनदेखी: क्या हैं खुदाई के मानक? किसी भी निर्माण कार्य के लिए की जाने वाली खुदाई के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) और स्थानीय विकास प्राधिकरण के सख्त नियम हैं। मुख्य मानक निम्नलिखित हैं:
सॉइल टेस्टिंग (मिट्टी की जांच): खुदाई से पहले मिट्टी की भार वहन क्षमता जांची जाती है। यदि मिट्टी भुरभुरी है, तो गहरी खुदाई आसपास की इमारतों की नींव को हिला सकती है।
शॉरिंग और रिटेनिंग वॉल: यदि खुदाई 5-10 फीट से अधिक गहरी है, तो बगल की जमीन को धंसने से रोकने के लिए लोहे की शीट या कंक्रीट की रिटेनिंग वॉल बनाना अनिवार्य है। इस साइट पर सुरक्षा के ऐसे इंतजाम नगण्य दिख रहे हैं।
बफर जोन: पेट्रोल पंप और पहले से निर्मित बहुमंजिला इमारतों के एकदम करीब इतनी गहरी खुदाई करना सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है।

बहुमंजिला इमारत के लिए नींव की गहराई: आमतौर पर एक बहुमंजिला इमारत के लिए खुदाई इस बात पर निर्भर करती है कि वहां कितने फ्लोर का बेसमेंट बनना है: सिंगल बेसमेंट: 10 से 12 फीट, डबल बेसमेंट: 20 से 25 फीट, ट्रिपल बेसमेंट: 30 से 35 फीट; 45 से 50 फीट की खुदाई का मतलब है कि वहां 4 से 5 स्तर का बेसमेंट प्रस्तावित है या फिर वहां से अवैध रूप से खनिज (मिट्टी/पत्थर) निकाला जा रहा है। इतनी गहराई पर जाने के लिए विशेष इंजीनियरिंग अनुमति और स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है।

प्रशासन और विभाग की भूमिका पर सवाल: इतने बड़े पैमाने पर हो रही खुदाई ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं:
विकास प्राधिकरण: क्या मानचित्र में इतनी गहरी खुदाई और बहु-स्तरीय बेसमेंट की अनुमति दी गई है? क्या निर्माण स्थल पर सुरक्षा जाली और बोर्ड लगाया गया है।
खनिज विभाग: शहरी क्षेत्र में 50 फीट खुदाई का मतलब है भारी मात्रा में पत्थर और मिट्टी का निकलना। क्या इन डम्फरों के पास ‘रॉयल्टी’ या खनिज परिवहन का वैध परमिट है? रात में मशीनों का चलना अक्सर अवैध खनन की ओर इशारा करता है।
जिला प्रशासन: रिहायशी इलाके में भारी मशीनों के कारण होने वाले ध्वनि प्रदूषण और पेट्रोल पंप जैसी संवेदनशील जगह के पास सुरक्षा ऑडिट की जिम्मेदारी प्रशासन की है।
हादसे को न्यौता: आसपास की इमारतों में रहने वाले लोगों का कहना है कि यदि बारिश होती है या जमीन के अंदर जलस्तर में बदलाव आता है, तो 50 फीट गहरा यह गड्ढा बगल के पेट्रोल पंप और कमर्शियल बिल्डिंगों के लिए काल बन सकता है। शासन-प्रशासन की चुप्पी किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है।

क्या वाकई है 45 फीट की अनुमति?: जब इस मामले में निर्माण कार्य करा रहे उत्तरदायी व्यक्तियों और ठेकेदारों से बात की गई, तो उनका दावा है कि यह खुदाई अवैध नहीं है। कार्यस्थल पर मौजूद प्रतिनिधियों का कहना है कि उनके पास प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से 45 फीट गहराई तक खुदाई करने की विधिवत अनुमति मौजूद है। उनका तर्क है कि भविष्य की बड़ी परियोजना और बहुमंजिला ढांचे की मजबूती के लिए इतनी गहराई तक जाना तकनीकी रूप से आवश्यक है। हालाँकि, निर्माण पक्ष के इस दावे ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं:
सुरक्षा ऑडिट: यदि 45 फीट की अनुमति मिली भी है, तो क्या इतनी गहराई के लिए जरूरी ‘रिटेनिंग वॉल’ और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है?
खनिज निकासी: क्या प्रशासन ने केवल खुदाई की अनुमति दी है या वहां से निकलने वाले बेशकीमती पत्थरों और मिट्टी के व्यावसायिक परिवहन की भी मंजूरी दी है?
पड़ोसी इमारतों की सुरक्षा: 45 फीट का गड्ढा पास में स्थित पेट्रोल पंप और अन्य कमर्शियल बिल्डिंगों की ‘सॉइल स्टेबिलिटी’ (मिट्टी की स्थिरता) को प्रभावित कर सकता है। क्या अनुमति देने से पहले इन जोखिमों का आकलन किया गया था?

प्रशासनिक अनुमति का दावा अपनी जगह है, लेकिन धरातल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना और रात के अंधेरे में मशीनों का भारी शोर स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ा रहा है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इन दावों की सत्यता की जांच करता है या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार किया जा रहा है।










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