झाँसी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश भर में गेहूं खरीद अभियान 30 मार्च से शुरू कर दिया गया है, जिसके तहत इस वर्ष 50 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों की सुविधा के लिए लगभग 6500 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां ₹2585 प्रति क्विंटल MSP पर सीधे खरीद की जाएगी।

इस वर्ष खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली लागू की गई है। किसानों को गेहूं बेचने से पूर्व खाद्य विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। भुगतान सीधे किसानों के आधार लिंक्ड बैंक खातों में किया जाएगा, जिसके लिए खाता एनपीसीआई पोर्टल पर मैप एवं सक्रिय होना आवश्यक है।
विकास भवन सभागार में आयोजित गेहूं खरीद 2026-27 कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए मुख्य विकास अधिकारी जुनैद अहमद ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अधिक से अधिक किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित कराया जाए, ताकि उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपना नाम एवं आधार विवरण सही दर्ज करें। यदि किसान स्वयं केंद्र पर उपस्थित नहीं हो पाते हैं तो नामित परिवार सदस्य का आधार विवरण देना अनिवार्य होगा।

सीडीओ ने भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस वर्ष संभावित अधिक खरीद को देखते हुए पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही मंडी सचिवों को निर्देशित किया गया कि मंडी परिसरों में व्यापारियों द्वारा रखे गए सामान को हटाकर चबूतरों को खाली कराया जाए, जिससे गेहूं भंडारण में कोई समस्या न हो।
शासन के निर्देशानुसार खरीद प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। यदि किसी क्रय केंद्र पर समस्या आती है तो किसान जिला खाद्य विपणन अधिकारी कार्यालय के कंट्रोल रूम (0510-4063090) पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार पारदर्शी व्यवस्था और सीधे भुगतान प्रणाली से किसानों को लाभ मिलेगा तथा बिचौलियों की भूमिका कम होगी, जिससे प्रदेश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।










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