झाँसी। जिले का प्रतिष्ठित सर्किट हाउस, जहां देशभर से विधायक, सांसद, मंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ठहरते हैं, अब अपनी दुर्दशा को लेकर चर्चा में है। सौंदर्यीकरण के नाम पर यहां कथित रूप से पुरानी और जंग लगी जालियों को रंग-पुताई कर दोबारा लगाया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, यह जालियां कहीं और से हटाकर लाई गई प्रतीत होती हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि संभवतः इन्हें मेडिकल कॉलेज परिसर के बाहर से उखाड़कर यहां खपाया गया हो। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थल की स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि करोड़ों के बजट वाले वीआईपी परिसर में यदि पुरानी सामग्री का उपयोग हो रहा है, तो फिर नए निर्माण और गुणवत्ता की बातें किसलिए? क्या यह सरकारी धन की बचत है या फिर किसी और स्तर पर खेल? सर्किट हाउस जिले की प्रशासनिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है। ऐसे स्थान पर यदि जंग लगी ग्रिलें लगाई जा रही हैं, तो यह न केवल सौंदर्य पर धब्बा है बल्कि कार्य की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।

जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इस कार्य की स्वीकृति किसने दी और गुणवत्ता परीक्षण किस आधार पर किया गया? अब निगाहें प्रशासन की प्रतिक्रिया और संभावित जांच पर टिकी हैं।












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