टहरौली (झाँसी)। सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद टहरौली तहसील के कुकरगाँव बालू घाट पर अवैध खनन का खेल खुलेआम जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद पाँच दिन पूर्व तहसील प्रशासन, पुलिस, खनिज एवं वन विभाग की संयुक्त टास्क फोर्स ने मौके पर पहुँचकर औपचारिकता निभाते हुए कार्रवाई का दावा तो कर दिया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

मौके पर आज भी वही हालात बने हुए हैं। बल्कि स्थानीय लोगों का कहना है कि हालात और बदतर हो गए हैं। पहले से अधिक पोकलैंड मशीनें और प्रतिबंधित लिफ्टर बेतवा नदी के तट पर लगातार गरज रहे हैं और नदी के सीने को छलनी करते हुए अवैध रूप से बालू निकाल रहे हैं। प्रशासन की कथित कार्रवाई के बाद भी अवैध खनन का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागों की शह और मिलीभगत के बिना इतना बड़ा अवैध खनन संभव ही नहीं है। वायरल वीडियो के बाद जिस प्रकार की कार्रवाई अपेक्षित थी, वह नदारद है। टास्क फोर्स द्वारा दी गई रिपोर्ट में सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश तो हुई, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है।

योगीराज में कानून व्यवस्था और सख्त कार्रवाई की बात होती है, लेकिन कुकरगाँव घाट पर अधिकारियों की ढुलमुल कार्यशैली कई सवाल खड़े कर रही है। क्या अधिकारियों को इस अवैध खनन का पता नहीं? या फिर केवल खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली गई? अब सबकी निगाहें जिले के उच्चाधिकारियों पर टिकी हुई हैं कि क्या वे इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर कठोर कार्रवाई करेंगे, या फिर पहले की तरह केवल सूचना देकर छापेमारी का दिखावा भर किया जाएगा।
बेतवा नदी को खोखला करते इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है, वरना आने वाले दिनों में इसका पर्यावरणीय और सामाजिक असर बेहद गंभीर हो सकता है।












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