भारत-रूस शिखर वार्ता में नई ऊर्जा, 16 बड़े समझौते, 2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

Spread the love

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच राजधानी दिल्ली में हुआ 23वाँ वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन दोनों देशों के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। बैठक के दौरान रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और समुद्री कनेक्टिविटी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में कुल 16 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

दोनों नेताओं ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोस्ती को “विश्वास पर आधारित, बहु-आयामी साझेदारी” बताया और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया।

रक्षा क्षेत्र में नई दिशा– शिखर वार्ता का मुख्य आकर्षण रक्षा सहयोग रहा। अब तक के ‘खरीदार-विक्रेता मॉडल’ से आगे बढ़ते हुए दोनों देशों ने संयुक्त अनुसंधान, सह-विकास और सह-उत्पादन पर जोर देने का फैसला किया। हथियारों के पुर्जे, मेंटेनेंस और तकनीकी सहयोग का बड़ा हिस्सा अब भारत में ही होगा। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा में रूस की बड़ी आश्वस्ति– रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को ऊर्जा और कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति का भरोसा दिया। वैश्विक तेल संकट और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस ने भारत के लिए ईंधन को प्राथमिकता देने की घोषणा की, जिसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है।

व्यापार, निवेश और नई आर्थिक रणनीति– दोनों देशों ने व्यापार बढ़ाने के लिए पाँच वर्षीय आर्थिक मसौदा स्वीकार किया। इस मसौदे के तहत-स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ानाडिजिटल भुगतान प्रणाली का साझा उपयोगकृषि, खाद्य सुरक्षा और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देनाइसके साथ ही भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ताओं को तेज करने पर भी सहमति बनी।

समुद्री और कनेक्टिविटी समझौते– शिखर सम्मेलन में आर्कटिक क्षेत्र, ध्रुवीय समुद्री मार्गों, बंदरगाह सहयोग और जलमार्ग विकास से जुड़े समझौते भी हुए। इससे भारत–रूस व्यापार मार्गों को तेज़, सुरक्षित और कम लागत वाला बनाने की योजना है। इसके साथ ही यूरेशियन कॉरिडोर को सक्रिय करने का रोडमैप भी साझा किया गया।

श्रमिक गतिशीलता, वीज़ा और शिक्षा– दोनों देशों ने प्रवासी श्रमिक गतिशीलता पर समझौता करते हुए यह सुनिश्चित किया कि भारत और रूस के नागरिक रोजगार के अवसरों के लिए आसानी से एक-दूसरे देशों में जा सकेंगे। रूस ने भारतीय नागरिकों के लिए 30-दिवसीय मुफ्त ई-टूरिस्ट वीज़ा सुविधा की घोषणा की। शिक्षा, स्वास्थ्य अनुसंधान, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मीडिया सहयोग पर भी समझौते किए गए।

दोनों नेताओं के बयान– प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “भारत-रूस संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। हमारी साझेदारी भरोसे, सम्मान और आपसी हितों पर आधारित है।” वहीं राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि “भारत रूस का विश्वसनीय मित्र रहा है। हम व्यापार और तकनीक के हर क्षेत्र में भारत के साथ संबंध और मजबूत करना चाहते हैं।”

भारत-रूस शिखर सम्मेलन ने संकेत दिया है कि दोनों देश आने वाले वर्षों में केवल रक्षा और ऊर्जा सहयोग से आगे बढ़कर बहु-स्तरीय रणनीतिक भागीदारी की ओर अग्रसर हैं। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच यह बैठक दोनों देशों की दीर्घकालिक कूटनीति और आर्थिक हितों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *