प्रेमनगर में दलित युवक की पिटाई का मामला गरमाया, बंद कमरे में बेरहमी से मारते रहे दबंग

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दलितों पर बढ़ते अत्याचारों को लेकर क्षेत्र में आक्रोश, पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

झाँसी। प्रेमनगर थाना क्षेत्र के बल्लमपुर मोहल्ले में दलित युवक की बर्बर पिटाई का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में रोष फैल गया है। बंद कमरे में युवक को लात-घूसों, डंडों और चप्पलों से पीटते हुए दबंगों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सामने आए दृश्य ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दलित समाज के लोगों पर अत्याचार किस हद तक बढ़ते जा रहे हैं।

पीड़ित हर्ष वाल्मीकि, जो प्राइवेट काम करता है, ने बताया कि 22 नवंबर को वह राजगढ़ स्थित गोस्वामी रेस्टोरेंट के पास खड़ा था। तभी निशांत सक्सेना, सुकृत और कनिष्क उसके पास आए और सिगरेट पीने के बहाने उसे स्कूटी पर बैठाकर अपने साथ ले गए। हर्ष को सीधे निशांत के घर ले जाया गया, जहां कमरे में बंद करके उसकी बेरहमी से पिटाई की गई।

हाथ में तमंचा लिए हए मुख्य आरोपी

बताया जाता है कि दबंगों ने उससे हाथ जोड़कर माफी मंगवाई, लेकिन इसके बावजूद लात-घूसों और चप्पल से उसे पीटा। वायरल वीडियो में एक आरोपी को तमंचा लहराते हुए हर्ष पर नंगे होने का दबाव डालते भी देखा जा रहा है। इस घटना ने समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा कर दिया है, विशेषकर दलित समुदाय में।

इस मामले पर सीओ सदर रामवीर सिंह ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर प्रेमनगर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सुकृत, आनंद नायक और कनिष्क को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं मुख्य आरोपी निशांत सक्सेना अब भी फरार है, जिसके लिए पुलिस की टीम लगातार दबिश दे रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दलित समाज के लोगों पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। सामाजिक समानता और सुरक्षा की बात करने वाले दावों के बीच ऐसी घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि अभी भी समाज के निचले वर्ग के लोगों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न की मानसिकता समाप्त नहीं हो पाई है।

पीड़ित हर्ष वाल्मीकि ने न्याय की मांग की है और कहा है कि ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी और दलित युवक को इस तरह की प्रताड़ना न झेलनी पड़े। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों पर कड़े कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है।

यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था को चुनौती देती है, बल्कि दलितों के प्रति हो रहे अत्याचारों की एक और दर्दनाक कहानी को उजागर करती है।

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