रक्षा मंत्री से महिला शिक्षक संघ ने मुलाकात कर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की

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झाँसी । सुप्रीम कोर्ट के द्वारा शिक्षकों को के लिए टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता के चलते देश भर के लाखों शिक्षकों को अपने नौकरी पर संकट मंडराता दिख रहा है, तो वही इस संकट के समाधान के लिए अखिल भारतीय एवं उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ अपनी पूरी शक्ति के साथ मैदान में है। संगठन के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की जा चुकी है जिसकी सुनवाई 17 दिसंबर से होनी है आज संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से नई दिल्ली में मुलाकात कर ज्ञापन सौंपते हुये इस समस्या के समाधान की मांग की है। महिला शिक्षक संघ की राष्ट्रीय एवं प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना मौर्य के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा मंत्री से मिलकर उन्हें शिक्षकों की समस्याओं से एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 एवं एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के प्रावधानों से अवगत कराया, जिसमें 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षक वैधानिक रूप से मान्य हैं, और नियुक्ति की समस्त अर्हता को पूर्ण किए हुए हैं किंतु बाद में नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता थोपकर उनके साथ घोर अन्याय किया जा रहा है। देशभर में 18 लाख से अधिक एवं केवल उत्तर प्रदेश में लगभग 2 लाख योग्य शिक्षक, जो नियुक्ति के समय सभी अर्हताएँ पूर्ण कर चुके थे, आज 2017 के संशोधन अध्यादेश के कारण संवैधानिक अधिकारों से वंचित हैं। इस अन्याय के कारण अनेक शिक्षकों ने आत्महत्या तक कर ली, लाखों परिवार अवसाद में हैं तथा घर-गृहस्थी ऋण तले दबे हैं। राष्ट्रीय महिला शिक्षक संघ ने रक्षा मंत्री से निवेदन स्वरूप मांग करते हुए कहां की टीईटी की अनिवार्यता को समाप्त कर लाखों शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित करे। रक्षा मंत्री ने गंभीरता से बिंदुवार शिक्षकों की बात सुनी और उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। इस दौरान संगठन की पदाधिकारी में रितु त्यागी, रूबी शाक्य, सर्वेश कुमारी, संगीता सिंह, शशि कौशिक, पूनम सक्सेना, मेधा सिंह मौजूद रही।

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