जहां भाव, वहीं भगवान- भागवत कथा में श्रोताओं ने पाया अलौकिक आनंद

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झाँसी। सिद्धेश्वर बालाजी धाम मंदिर ट्रस्ट, राय परिवार हंसारी, कलचुरी समाज एवं भूतपूर्व सैनिकों के संगठन के तत्वावधान में हंसारी में चल रही श्रीमद भागवत कथा में कथा व्यास पं. जितेन्द्र भारद्वाज ने तृतीय दिवस ध्रुव चरित्र,जड भरत कथा एवं प्रहलाद चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान तो भाव के भूखे होते हैं। भगवान कृष्ण ने दुर्योधन के मेवा त्यागे शाग विदुर घर खाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई यह सुंदर भजन सुनाया, जिसे सुन श्रोता मंत्रमुग्ध हो गये।उन्होंने कहा कि सदगुरु की कृपा के चलते हमें बैकुण्ठ की प्राप्ति हो जाती है पर मन की चंचलता के कारण हमारा मन सत्संग में नहीं लगता है।नवधा भक्ति का विस्तार से वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि कि भगवान वस्त्र पहन लेने से हर कोई संत नही बन जाता है। संत तो वह है जो सत्य का आचरण करे,हृदय में करुणा और सभी में भगवान के दर्शन करे तथा मन निर्मल हो,यही संत के गुण हैं।

मानव तन को दुर्लभ बताते हुए वे कहते हैं मानस में गोस्वामी जी लिखते हैं “बडे भाग्य मानुष तन पावा,सुर दुर्लभ सब ग्रंथन गावा”। अर्थात मानव तन मिला है तो हर पल हरि स्मरण करते रहें तभी कल्याण होगा।प्रारंभ में मुख्य यजमान पूजा नितेंद्र राय फौजी, सीमा अमित राय, हेमन्त राय, प्रशांत राय, विजय राय, मधुर राय, पवन विश्वकर्मा ने कथा व्यास का माल्यार्पण कर श्रीमद भागवत पुराण की आरती उतारी। इस मौके पर ज्ञान सिंह, रवि राय, बद्री राय,शिवलाल पाल, लाल सिंह परिहार, निपुण राय, शिव शंकर राय, बादाम पाल, दिनेश पाल, विनोद शर्मा पत्रकार आदि उपस्थित रहे। हेमंत राय की ओर से श्रोताओं को हलुवा और उपमा का प्रसाद वितरित किया गया। अंत में नितेन्द्र राय फौजी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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