भारत की सीमाओं को हर मौसम में सुगम और सुरक्षित कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्वी लद्दाख में स्थित महत्वपूर्ण श्योक टनल सहित कुल 125 रणनीतिक इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। सीमा क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और सैन्य आवाजाही को बेहतर बनाने की यह पहल अब तक की सबसे बड़ी सामूहिक परियोजना मानी जा रही है।

दर्बुक–श्योक–दौलत बेग ओल्डी मार्ग पर निर्मित लगभग 920 मीटर लंबी श्योक टनल, कट-एंड-कवर तकनीक से तैयार की गई है। बर्फबारी, हिमस्खलन और कठोर जलवायु के कारण यह मार्ग अक्सर प्रभावित रहता था, लेकिन अब इस सुरंग के बन जाने से पूरे साल निर्बाध आवागमन संभव हो सकेगा। यह फॉरवर्ड पोस्ट तक पहुंच को और अधिक सुरक्षित व तेज बनाएगी, जिससे सैनिकों की तैनाती और रसद आपूर्ति में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएँ सीमाई क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और तैनात जवानों दोनों के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाएंगी। उनका कहना था कि कठिन पर्वतीय भूभाग में दिन-रात काम करने वाले BRO के इंजीनियरों एवं श्रमिकों की बदौलत आज देश के सामने नई संभावनाएँ खुली हैं। उन्होंने इसे सरकार की उस दृढ़ प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया, जिसके तहत सीमाओं को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने पर निरंतर कार्य हो रहा है।

इस अवसर पर समर्पित 125 परियोजनाएँ सात राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों में फैली हुई हैं। इनमें सड़कें, पुल, सुरंगें और अन्य सैन्य-महत्व की संरचनाएँ शामिल हैं, जिनका संयुक्त उद्देश्य सीमा क्षेत्रों को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ना है। इन परियोजनाओं से न केवल सामरिक मजबूती बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के रोजगार, व्यापार और दैनिक जीवन में भी नया संचार प्रवाह आएगा।

श्योक टनल का निर्माण भारत की सीमाई सुरक्षा को एक नए स्तर पर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है। यह सुरंग केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि उस संकल्प का प्रतीक है जिसके आधार पर देश कठिनतम परिस्थितियों में भी विकास और सुरक्षा दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।











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