झाँसी। शहर में पॉलिटेक्निक परिसर से जुड़े जमीन विवाद ने तूल पकड़ लिया है। पिछले कुछ दिनों से इस मामले को लेकर लगातार ज्ञापन दिए जा रहे हैं, प्रेस-वार्ताएँ की जा रही हैं और दीवार हटाने की मांग उठाई जा रही है। लेकिन अब इस पूरे विवाद में नया मोड़ सामने आया है।
सूत्रों के अनुसार, जिस दीवार को विवाद का कारण बताया जा रहा है, उसके पीछे असल खेल कुछ भू-व्यवसाईयों का है, जो पूरे घटनाक्रम को पर्दे के पीछे से संचालित कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि दो भू-व्यवसाईयों ने हाल ही में एक जमीन की रजिस्ट्री कराई है, जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। दावा किया जा रहा है कि खरीदी गई जमीन के कागजों में भारी हेराफेरी है और भू-व्यवसाई चाहते हैं कि पॉलिटेक्निक की ओर से रास्ता खुल जाए, ताकि उनकी विवादित जमीन सीधे एक नंबर में शामिल हो सके। यदि ऐसा हो जाता है तो यह जमीन देखते-देखते करोड़ों की कीमत वाली प्राइम लोकेशन में बदल जाएगी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दीवार को लेकर आवाज़ तो कुछ संगठनों ने उठाई है, लेकिन असल फंडिंग और पर्दे के पीछे की रणनीति कहीं और से संचालित हो रही है। यह भी चर्चा है कि इस “अभियान” को आगे बढ़ाने वालों को असली खेल की पूरी जानकारी नहीं है और भू-व्यवसाई इस पूरे विवाद का लाभ लेने का प्रयास रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं, तो यह पूरा मामला सिर्फ रास्ते या दीवार का नहीं, बल्कि भारी भरकम जमीन कारोबार और अवैध कब्जों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग की जा रही है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि असल भूमिका निभाने वालों का खुलासा हो सके।
फिलहाल, पॉलिटेक्निक की दीवार हटाने की माँग और इसके विरोध में चल रही बहस के बीच इस नए खुलासे ने शहर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। हालांकि पॉलिटेक्निक प्रशासन पूरे मामले में मौन साधे हुए है, आने वाले समय में देखना होगा यह मामला कहाँ जाकर रुकेगा।











Leave a Reply