इंडिगो में सेवा संकट गहराया, हजारों यात्री फँसे, उड़ानों में भारी देरी और कैंसिलेशन से बढ़ी परेशानी

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देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों गंभीर सेवा संकट से जूझ रही है। पायलटों और ग्राउंड-स्टाफ की कमी, तकनीकी समस्याओं और क्रू शेड्यूलिंग में आई अव्यवस्था के चलते शनिवार को बड़ी संख्या में उड़ानें घंटों तक विलंबित रहीं, जबकि कई उड़ानों को अचानक रद्द करना पड़ा। एयरपोर्ट्स पर सुबह से ही अव्यवस्था का माहौल दिखाई दिया और यात्रियों की लंबी कतारें एयरलाइन काउंटरों के सामने जमा हो गईं।

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे बड़े हवाई अड्डों पर इंडिगो के बोर्डिंग गेटों पर घोषणाएँ बार-बार बदलती रहीं। कई उड़ानें 3 से 8 घंटे तक देरी से उड़ान भरती रहीं, वहीं कुछ यात्रियों को अंतिम समय पर बताया गया कि उनकी फ्लाइट रद्द कर दी गई है। अचानक हुए इस संकट से यात्रियों में गहरा रोष दिखा और कई लोग एयरलाइन से स्पष्टीकरण मांगते नजर आए।

सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को हुई, जिन्हें बिजनेस मीटिंग्स, कनेक्टिंग फ्लाइट्स या इमरजेंसी कार्यों के लिए यात्रा करनी थी। घंटों फंसने के बाद भी कई यात्रियों को न तो स्पष्ट जानकारी मिली और न ही वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था। कई परिवार छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ एयरपोर्ट के फर्श पर बैठे इंतजार करते रहे। पानी और भोजन तक के लिए भी उन्हें लंबी लाइनों का सामना करना पड़ा। कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि एयरलाइन के काउंटरों पर पर्याप्त कर्मचारी मौजूद नहीं थे और जो थे भी, वे स्पष्ट जवाब देने की स्थिति में नहीं थे।

इंडिगो प्रबंधन ने बयान जारी कर कहा है कि अप्रत्याशित स्टाफिंग-समस्या और परिचालन दबाव से उड़ानों पर असर पड़ा है। एयरलाइन ने यात्रियों से असुविधा के लिए खेद जताते हुए कहा है कि स्थिति को सामान्य करने के लिए आपात कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट अचानक नहीं, बल्कि कई दिनों से बढ़ रही आंतरिक अव्यवस्था का परिणाम है।

हैरानी की बात यह है कि अत्यधिक भीड़ वाले सर्दियों के यात्रा-सीजन में इस तरह की स्थिति उत्पन्न होना देश की विमानन सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। एयरपोर्ट प्राधिकरणों ने भी इंडिगो से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जबकि यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा कर एयरलाइन के प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।सेवा संकट के चलते लाखों यात्रियों की योजनाएँ प्रभावित हुई हैं और एयरलाइन पर दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द से जल्द सामान्य संचालन सुनिश्चित करे, ताकि देश की सबसे बड़ी एयरलाइन पर लोगों का भरोसा बना रहे।

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