झाँसी। शहर में सरकारी जमीन को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। नगर निगम का कहना है कि मौजा झाँसी खास की आराजी (खसरा) संख्या 1370 में शामिल जमीन के कुछ हिस्सों को लेकर फर्जी तरीके से बैनामे कर दिए गए। आरोप है कि जमीन की असली स्थिति छिपाकर लोगों ने कागजों में हेरफेर की और कई रजिस्ट्री करा दीं, जिससे नगर निगम और सरकार को नुकसान हुआ है। नगर निगम की तरफ से यह बात थाना कोतवाली में दी गई रिपोर्ट में कही गई है। निगम का कहना है कि यह जमीन कई हिस्सों में दर्ज है और इसमें से एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जिसे निगम सरकारी संपत्ति मानता है और उसका देखरेख भी नगर निगम के पास है।
कितनी जमीन है, क्या विवाद है?- नगर निगम के अनुसार खसरा संख्या 1370 का कुल क्षेत्रफल करीब 20.95 एकड़ है। इसमें अलग-अलग तरह की एंट्री है— कुछ जगह जमींदारी, कुछ जगह दूसरे नामों में दर्ज दिख रही है। निगम का दावा है कि इसी खसरा नंबर में करीब 3.882 हेक्टेयर जमीन राज्य सरकार की संपत्ति है, जिसका प्रबंधन नगर निगम करता है। निगम ने यह भी बताया कि यह खसरा नंबर “मिनजुमला” श्रेणी में आता है, यानी इसमें कई हिस्से और रिकॉर्ड जुड़े हुए हैं। ऐसी स्थिति में जमीन के हिस्से साफ-साफ बंटे हुए नहीं हैं, इसी वजह से विवाद की संभावना ज्यादा बन जाती है।
पहले से चल रहा था कोर्ट का केस- नगर निगम के मुताबिक इसी जमीन को लेकर पहले से सिविल कोर्ट में मामला चल रहा है। बताया गया है कि मूल वाद संख्या 593/2020 के तहत यह मामला कोर्ट में गया था और कोर्ट ने 09 मार्च 2021 को “यथास्थिति” बनाए रखने का आदेश दिया था। यथास्थिति का मतलब होता है कि जिस हालत में जमीन है, वैसी ही रहे, कोई नया निर्माण या खरीद-बिक्री जैसी गतिविधि न हो।
स्टे के बावजूद कर दी गईं रजिस्ट्री- नगर निगम की शिकायत में आरोप है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद कुछ लोगों ने इस जमीन में बैनामे कर दिए और रजिस्ट्री करा ली। निगम ने कहा कि उसने कई पंजीकृत बैनामों की कॉपी जुटाई है और उनका सत्यापन भी कराया गया है। सत्यापन के बाद यह बात सामने आई कि 09 मार्च 2021 के बाद भी कई रजिस्ट्री हुईं। नगर निगम का कहना है कि इस तरह की खरीद-बिक्री से सरकारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश हो सकती है और इससे सरकार व नगर निगम को भारी नुकसान हो सकता है।
नगर निगम ने पुलिस से क्या मांग की?- नगर निगम ने पुलिस से मांग की है कि इस मामले में जिन-जिन लोगों ने अवैध रूप से बैनामे कराए हैं या कराए जाने में मदद की है, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।निगम का कहना है कि यह मामला सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और नियमों को तोड़कर जमीन बेचने से जुड़ा है, इसलिए जांच जरूरी है।
पुलिस कर रही जांच– फिलहाल यह मामला थाना कोतवाली तक पहुंच चुका है। पुलिस अब दस्तावेजों की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि जमीन किसकी है, किस आधार पर बैनामे हुए और किन लोगों की भूमिका रही। नगर निगम की ओर से उम्मीद जताई गई है कि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी और सरकारी जमीन को सुरक्षित किया जा सकेगा।












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