झाँसी। थाना रक्सा क्षेत्र से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्राम रक्सा निवासी अमनदीप सिंह चौधरी पुत्र स्वर्गीय शिवचरण चौधरी ने अपने विरुद्ध दर्ज मुकदमे को झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक झाँसी को प्रार्थना पत्र सौंपा है। प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि उसे साजिशन एक मामले में फंसाया गया है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराए जाने की आवश्यकता है।

प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि दिनांक 28 दिसंबर 2025 को वह अपने निवास पर मौजूद था। दोपहर लगभग 2 बजकर 11 मिनट पर उसे अपनी भाभी के माध्यम से सूचना मिली कि उसके बड़े भाई के साथ जनकपुर रोड स्थित गैस एजेंसी के पास कुछ लोगों द्वारा मारपीट की जा रही है। सूचना मिलते ही वह अकेले ही घटना स्थल की ओर रवाना हुआ, लेकिन जब वह जनकपुर रोड पर पहुंचा तो थाना रक्सा की पुलिस पहले से मौके पर मौजूद थी। पुलिस के पहुंचने से पहले ही कथित हमलावर वहां से फरार हो चुके थे। प्रार्थी का कहना है कि न तो उसकी किसी आरोपी से मुलाकात हुई और न ही घटना में उसकी कोई भूमिका रही।
मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब सिविल अस्पताल की CCTV फुटेज सामने आने की बात कही गई। प्रार्थी के अनुसार अस्पताल में लगे कैमरों में विपक्षी व्यक्ति शाम करीब 5 बजकर 30 मिनट पर पूरी तरह सही-सलामत दिखाई देता है। इसके कुछ समय बाद वही व्यक्ति शाम लगभग 6 बजकर 30 मिनट पर सिर पर पट्टी बंधवाकर अस्पताल में प्रवेश करता हुआ कैमरे में कैद है। वहीं दूसरी ओर विपक्षियों का दावा है कि उनके साथ मारपीट दोपहर करीब 2 बजकर 30 मिनट पर हुई थी। इस समय अंतर को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और कथित मारपीट की कहानी पर संदेह गहराता जा रहा है।
प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि विपक्षियों द्वारा फर्जी मेडिकल तैयार कराकर और दबाव बनाने की नीयत से उसे झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। उसका कहना है कि घटना से संबंधित वीडियो और फोटो साक्ष्य उसके पास मौजूद हैं, साथ ही कई स्वतंत्र और प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी हैं, जिन्हें वह जांच के दौरान प्रस्तुत करने को तैयार है। प्रार्थी का स्पष्ट कहना है कि उसका इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है और उसे बेवजह प्रताड़ित किया जा रहा है।
अंत में अमनदीप सिंह चौधरी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, स्वतंत्र और तथ्यात्मक जांच कराई जाए, सिविल अस्पताल की CCTV फुटेज सहित सभी साक्ष्यों का अवलोकन किया जाए और निर्दोष पाए जाने पर उसका नाम मुकदमे से हटाया जाए, ताकि उसे न्याय मिल सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रार्थना पत्र प्राप्त हो गया है और तथ्यों के आधार पर मामले की जांच कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।











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